तुम और मैं
तुम और मैंजैसे कागज़ पर लिखी एक हसीन कविताकुछ एहसासात बिखेरती हुईकुछ लम्हों को अलफ़ाज़ में पिरोती हुईदिल के तारों को छूती हुईख़्वाबों को आँखों में सजाती हुईजीने की इक आस जगाती हुई … तुम और मैंजैसे सावन की पहली बरसातजैसे सर्दी में धूप का एहसासजैसे सागर का आलिंगन करता ठंडा हवा का झोंकाजैसे काले … Read more